द इंडिया डायरी
विचार

स्थानीय रिपोर्टिंग जानबूझकर धीमी होती है

डायरी का तर्क है कि जाँचा हुआ पैरा एक वायरल मिनट से ज़्यादा क़ीमती है।

आशा मेनन · प्रधान संपादक · · 3 मिनट का पठन · 8,712 बार पढ़ा गया

स्थानीय रिपोर्टिंग जानबूझकर धीमी होती है
स्थानीय रिपोर्टिंग जानबूझकर धीमी होती है — द इंडिया डायरी

जो न्यूज़रूम हर अफ़वाह का जवाब उसी मिनट देता है, वह अंत में अफ़वाह ही छाप देता है। धीमी आदत — दूसरा स्रोत, आदेश पढ़ना, अंक का इंतज़ार — यही उत्पाद है।

रफ़्तार पाठक को कहीं से भी मिल जाती है। वे यहाँ तब आते हैं जब उन्हें वह वाक्य चाहिए जो शाम तक खड़ा रहे।

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